दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।

Thursday, June 7, 2007

गा मेरे मन गा !

अंतरा चौधरी





जाएं तो जाएं कहां





जागृति





जीना यहां





जीना इसी का नाम है





ज्वेल थीफ़




ममता





मैं तुम्हारी हूं-एक





मैं तुम्हारी हूं-दो





मान अपमान





मीनू





मुनीमजी





मुक्ति

1 comment:

मोहिन्दर कुमार said...

कुछ गीत तो दुनिया की खातिर,
सुर ताल पे गाये जाते है,
कुछ गीत मगर तन्हायी में
खुद को भी सुनाये जाते हैं