टूटी हुई बिखरी हुई
क्योंकि वो बिखरकर भी बिखरता ही नहीं
दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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पत्थर और पायल
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पत्थर और पायल
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Friday, April 25, 2008
ऐसो पापी सावन आयो सावन आग लगाये रे...
ये है फ़रज़ाना के पसंदीदा गानों में से एक.
फ़िल्म:
पत्थर और पायल
(1974)
डायरेक्टर:
हर्मेश मल्होत्रा
संगीत:
कल्यानजी-आनंदजी
गीत:
वर्मा मलिक
सितारे:
धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, विनोद खन्ना, अजीत, जयश्री, राजेंद्र नाथ और इफ़्तेख़ार
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