दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।

Monday, June 11, 2007

सलमा सुल्तान


उन्होंने दस साल पहले वॉलंटरी रिटायरमेंट ले लिया. चालीस साल पहले वो दूरदर्शन का पर्याय हुआ करती थीं. वो भोपाल की रहनेवाली हैं. इन दिनों दिल्ली में रहती हैं और अपना प्रोड्क्शन हाउस चलाती हैं. कुछ दिनों पहले उन्होंने डीडी न्यूज़ के लिये 'जलता सवाल' नाम की सीरीज़ बनाई थी. 'पंचतन्त्र से', 'सुनो कहानी' और 'स्वर मेरे तुम्हारे' जैसे प्रोग्रामों के अलावा कई डॉक्यूमेंट्रीज़ भी वो बना चुकी हैं। उनके पिता मोहम्मद असग़र अंसारी मप्र के कृषि मंत्रालय मे सेक्रेटरी रह चुके हैं, उनसे 18 साल बडी उनकी बहन मैमूना सुल्तान को मप्र की पहली महिला एमपी बनने का गौरव हासिल है. बडी बहन और पिता ने उन्हें बहुत सहारा दिया. उनका रुझान देखते हुए उन्हें डांस और ड्रामा की दुनिया में विचरने का मौक़ा दिया. 1966-67 में उन्होंने दिल्ली विवि से अंग्रेज़ी में मास्टर डिग्री ली. तभी से वो 'नमस्कार! ये दिल्ली दूरदर्शन है' कहती हुई टीवी पर दिखाई देने लगीं। 1968 में वो मिस यूनाइटॆड नेशंस चुनी गईं. 1969 में उनकी शादी आमिर क़िदवई से हुई. आमिर का ताल्लुक़ रफ़ी अहमद क़िदवई खानदान से है. दो बच्चे हैं. शाद बडा बेटा है, जो इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट में ज्वॉइंट कमिश्नर है और सना छोटी बेटी है जो कुशल नृत्यांगना है और अमरीका में डांस सिखाती है।

डीडी आर्क, सी.एल.ह्क्कू के लिखे पर आधारित.

10 comments:

Sanjeet Tripathi said...

वाह! शुक्रिया इरफ़ान जी सलमा जी के बारे मे जानकारी देने के लिए।
हम जब बच्चे थे बस एक इन्ही एंकर के नाम व चेहरे से परिचित थे।

उन्मुक्त said...

मुझे उनकी एक बात याद है वे अक्सर बिन्दी भी लगाती थीं।

Nataraj said...

भावहिन चहरे के साथ समाचार पढ़ने वाली सलमाजी सरकारी दूरदर्शन की आइकोन थी.

बजार वाला said...

waah !! waah !! aisee hi bhooli bisari yaad karate raha kijiye.

अतुल शर्मा said...

सलमाजी के बारे में जानना अच्छा लगा। मैंने भी बचपन में उन्हें दूरदर्शन पर निरपेक्ष भाव से समाचार पढ़ते हुए देखा है। कभी कभी उनके बालों में फूल भी होता था शायद पीला गुलाब।

Gaurav Pratap said...

सलमा जी के बारे मे जानकारी देने के लिए धन्यवाद

Gaurav Pratap said...

सलमा जी के बारे मे जानकारी देने के लिए धन्यवाद

Divine India said...

हम तो उस जमाने में उनके बहुत बड़े प्रशसक थे!!

Sanjay said...

सलमा जी के समाचार पढ़ने का अंदाज अलग रहा. वे हमेशा संवाददाता को संवादाता कहती थीं.

shaffkat said...

सलमा साहिबा को टकटकी लगा कर देखा करता था.वोह मासूमियत भरा हुस्न सोया सोया -खोया खोया सा मगर खबर नवाजी के वक्त आपने खास अंदाज़ में एकदम सजग . यह जानकर बहुत खुशी है के मोहतरमा और पूरा खानदान खुश और खुर्रम हैं.जानकारी देने के लिए आपका बहुत शुक्रिया.