दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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Saturday, June 11, 2011

हुसेन साहब आप अक्सर याद आयेंगे !

मार्च २००३ की एक रात १.३० बजे का वक़्त। हुसेन साहब दिल्ली के एक साउंड स्टूडियो में इतने तारो ताज़ा कि जैसे दिन का वक्त हो । वो लाइनें रिहर्स कर रहे थे टेक पर टेक दे रहे थे ...ये उस आडियो बुक के प्रोडक्शन के दौर की बात है जिसे बनते हुए देखने और सुनने के लिए उनकी बेताबी हैरान कर देने वाली थी। "सुनो एमएफ़ हुसेन कि कहानी" नाम उन्होंने ही रखा ...पहले वो रखना चाहते थे "सुनो सुनो एमएफ़ हुसेन की कहानी" फिर खुद ही बोले इसमे मुनादी वाला सेन्स आ रहा है। ये उनकी लिखी आत्मकथा "एमएफ़ हुसेन की कहानी अपनी जुबानी" की अविकल प्रस्तुति है। इसमें और क्या क्या है ये बातें यहाँ इसी ब्लॉग पर मैं आपसे साझा करता रहा हूँ जो कि थोड़ी कोशिश के बाद आपको यहाँ मिल ही जायेंगी।




फिलहाल बस ये है कि दो दिनों से मन कुछ उचाट सा है ...ये जैसे किसी अपने को खोने जैसा है।



इस ऑडियो बुक को बनाने में जो क्रिएटिव फ्रीडम उन्हों ने मुझे दी और जो कदम ब कदम साथ चलने का जज्बा उन्होंने दिखाया वो सिर्फ वही कर सकते थे । "दादा की अचकन" इस पेशकश के उन हिस्सों में से एक है जिसे सुनते हुए उनकी आँखों में आंसू हमने देखे।



आज सुबह फिर उनके साथ रेकॉर्डिंग sessions के कुछ hisse सुने...



Bana bana ke ye duniya mitayi jati hai,
Zaroor koii kami hai jo payi jati hai.

इस शेर के कई टेक वो बिना मेरे कहे ही देते रहे जैसे इस बात की भीतरी परतें खोलना चाहते हों।





आइये सुनाते हैं आपको हुसेन साहब की आवाज़ः


Sunday, February 17, 2008

इस तरह शुरू होती है "सुनो एमएफ़ हुसेन की कहानी" Suno M.F.Husain Ki Kahani


हक्कू साहब ने इच्छा ज़ाहिर की है कि मैं अपने एक पुराने प्रोडक्शन की झलक यहाँ रखूँ. पेश करता हूँ ख़ुद हुसेन साहब की आवाज़ में इस नायाब ऑडियो बुक की ओपनिंग. इस पाँच घंटे की ऑडियो बुक का एक-एक शब्द हुसेन साहब का लिखा हुआ है. उन्होंने मेरे लिये पाँच नये अध्याय भी लिखे जो इन बावन छोटे-बडी कहानियों में शामिल हैं. टूटी हुई बिखरी हुई पर इनमें से एक दो कहानियाँ आप पहले भी सुन चुके हैं।








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Thursday, August 2, 2007

एक इटालियन ऑपरा




मशहूर पेंटर एमएफ़ हुसेन ने अपनी ऑडियो ऑटोबायोग्राफ़ी में इतालवी फ़िल्मों को कुछ इस तरह (नीचे) याद किया है.
एक इटालियन ऑपेरा नाम का यह एनेक्डोटल मेमोएर "सुनो एमएफ़ हुसेन की कहानी" के पांचवें वॉल्यूम में छ्ठवां ट्रैक है. इसमें शुरू में आवाज़ अपर्णा घोषाल की है और नरेट कर रहे हैं मुनीश.यह मेरे प्रोडक्शन हाउस रेडियो रेड की निर्मिति है.
यहां नीचे जो कुछ आप सुन पाएंगे या न सुन पाएंगे वह मेरा पहला पॉडकास्ट है और इसका सारा श्रेय भाई अभय को जाता है. कल अगर मैं उनकी दिखाई राह पर चल सका तो शायद आप मेरे आर्काइव से कुछ दिलचस्प पॉडकास्टिंग सुन सकेंगे.