दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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Monday, April 21, 2008

एक टीवीकर्मी की रामकहानी !


टीवी में काम कर चुके हर किसी में ऐसा दम नहीं जो राहुल पंडिता ने दिखाया. यह ग्राफ़िक नॉवेल मैंने कोई ढाई साल पहले देखी थी, तभी से चाहता था कि इसे आपके साथ शेयर करूँ. तरीक़ा कई बार निकाला लेकिन नाकाम रहा. अब एक कोशिश और कर रहा हूँ. टेक्स्ट और काँसेप्ट राहुल का है. इलस्ट्रेशंस राहुल के जिगरी यार शरद शर्मा ने किये हैं. नीचे दिख रहे पेजेज़ डबल क्लिक करने से अलग विंडो में बडे होकर मस्त दिखाई देंगे इसलिये इनके छोटे आकार से घबराइयेगा नहीं. अगर बात आप तक पहुँचे तो ज़रा ज़ोर से ताली बजाइयेगा.



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राहुल का लिखा एक पीस यहाँ भी है. उनकी फ़ोटो भी यहीं से साभार ली गई है.
यह पुस्तक सराय से हासिल की जा सकती है.