हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं “मुनव्वर राना”

Sunday, February 3, 2013

मोहें पागल बना के जवानी में...


फ़िल्म: सैंयां मगन पहलवानी में (1983) आशा भोंसले/ अंजान/ चित्रगुप्त

Sunday, January 27, 2013

किरन लखनवी की लिखी 'दहीवाली' से एक हिस्सा


शांति घर से मदनचंद की तलाश में निकल ही पड़ती है क्योंकि अब उसके पास 'मदनचंद की याद ही बाक़ी रह गयी है'. मदनचंद तो कोकिला की कूक का दीवाना है. दहीवाली के दही और कोकिला के दूध की धार के बीच मदनचंद बेचारा. (गूगल की पकड़ से बाहर किरन लखनवी) Artistes:- Azim. Razia Munni Ketkiwali Neyamat Ali. Amir Chand Shekhar. Kamlesh Mushtaq. Kamlesh Mishra Ishrat Ali Sharafat Ali Writer: Kiran Lakhnavi Music: Charan ji

Wednesday, January 23, 2013

अब सो जाओ: फ़हमीदा रियाज़

Sunday, October 7, 2012

इब्बार रब्बी की कविता-1


रामराज्य

Thursday, October 4, 2012

बलविंदर ड्राइवर


बलविंदर की उम्र कोई 55 साल है. ड्राइवर है. पिता पंजाब नेशनल बैंक में मैनेजर थे. पिता ने सिखाया कि काम हो या न हो. सुबह साढे तीन-चार बजे उठ जाया करो और पाठ-प्रार्थना कर के ही घर से निकला करो. बलविंदर पिता की सीख से कभी पीछे नहीं हटे. भाइयों में से एक अमरीका में दूसरा जापान में और तीसरा जर्मनी में है. खुद कहीं जाने की सोची नहीं क्योंकि उनका कोई नहीं है. 1988 में शादी हुई थी जो आखिरकार 2003 में तोडनी पडी. बीवी लडाई करती थी और बीमार मां को खाने को नहीं देती थी क्योंकि उसके पास से पेशाब की बास आती थी. तेरे को रहना है तो ठीक से रह वरना जा, कहने पर बीवी ने जाना ही तय किया. उसके घरवाले आ गये 25 लाख रुपये मांगने लगे. बलविंदर ने कहा इतना तो नहीं दे सकता. दोनों लडकियों के नाम 5-5 लाख रुपये जमा कराए और बीवी को एक लाख रुपया दिया, वो रोहतक जा बसी. लडकियों की याद में बलविंदर शीशगंज गुरुद्वारे में तीन साल तक मत्था नवाए रोया करता. लडकियां शुरु-शुरु में मिलने आती रहीं लेकिन फिर आ न सकीं क्योंकि बीवी को पता चलता तो लडकियों को मारती-पीटती. बलविंदर को टेंशन पसंद नहीं है, अब वो ठीक ज़िंदगी गुज़ार रहा है.

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