टूटी हुई बिखरी हुई
क्योंकि वो बिखरकर भी बिखरता ही नहीं
दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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गुलशन की बहारों में
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गुलशन की बहारों में
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Friday, August 24, 2007
सुनिये
- मेरी कमी होगी...
आज यूंही ब्लॊगलियों में आवारा भटक रहा था। अचानक नज़र पड़ी
मेरी कमी होगी...
याद आया कि ये गीत तो मेरे पिछले कई शोज़ ्का पसंदीदा गीत है। तो पेश है ये गीत भाई
नीरज
और आप सभी प्रेमी श्रोताओं को सप्रेम।
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