टूटी हुई बिखरी हुई
क्योंकि वो बिखरकर भी बिखरता ही नहीं
दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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फ़हमीदा रियाज़
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फ़हमीदा रियाज़
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Monday, December 31, 2007
फहमीदा रियाज़ की दो नज़्में और, साल को अलविदा
नज़्म- एक
नज़्म- दो
Saturday, December 29, 2007
एक ही जैसे दु:खद प्रसंग हैं...
...आइये सुनें मशहूर पाकिस्तानी शायरा
फ़हमीदा रेयाज़
की एक और नज़्म.
नोट: साल के इन बचे हुए दिनों में टूटी हुई बिखरी हुई पर बस यही होगा.
वो लड़की
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