दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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Monday, March 3, 2008

अकेले हम नदिया किनारे...


चार साल पहले जब रेनकोट फिल्म रिलीज़ हुई तब भी और आज तक इस फिल्म का संगीत आपका ध्यान नहीं खींच सका. रितुपर्णो घोष की फिल्म कला पर संदेह करने वालों में मैं भी हूँ लेकिन देबोज्योति मिश्रा ने इस फिल्म के लिये जो संगीत रचा उसका सौंदर्य देर तक ध्यान चाहेगा.
शुभा मुदगल की आवाज़ मे‍ सुनिये तो ज़रा ये गीत-