ये बात यूनिवर्सिटी के उन दिनों की है जब हम समाज और व्यवस्था के ख़िलाफ़ लोगों के मन में मौजूद ग़ुस्से को आवाज़ देते थे. उस आवाज़ में यूनिवर्सिटी रोड के समोसों और बासी तहरी का जोश तो होता था लेकिन कभी-कभी हम अपनी ही काविशों से बहुत आश्वस्त नहीं होते थे और सोचते थे कि हम एक ट्रेंडी रॉक ग्रुप जैसे हों तो वो लोग भी हमारी बात सुनेंगे जिनके लिये हम अक्सर एलियन और पराए लगते हैं.ये बीच-बीच में ऐसे खाते-पीते घरों के लडके भी हमारे ग्रुप में आ जाते थे जिन्हें ट्रेंडी जेश्चर्स लेने में कोई प्रयास नहीं करता पडता था और हमें लगता था कि जब हम स्टेज पर खडे होंगे तो बडे फ़ैशनेबल तो लगेंगें ही साथ में हमारा ऑडियेंस ग्रुप भी बढ जायेगा. बात कोई तेइस साल पुरानी है. ऐसे ही एक ऐक्टर-गिटारिस्ट के आने से कुछ धुनों में बदलाव भी आया. यहाँ मौजूद उस गिटार प्लेयर लडके का स्केच देखिये जो अब हासिल और चरस जैसी फ़िल्मों का निर्देशक है और कुशल एक्टर भी. 18 जुलाई 1986 को यह स्केच अज़दक ने बनाया था. बहरहाल अच्छा ही हुआ कि हम वैसे ट्रेंडी-अपमार्केट ग्रुप बनने के अपने ख़्वाब को पूरा नहीं कर सके.
आप देख रहे हैं कि उसी ग्रुप के अज़दक आज गा रहे हैं- देश सही जा रहा है.
और अब बात कोई दस साल पहले की. गोरख पांडे के एक गाने को दिल्ली के एक इंडी पॉप ग्रुप इंडियन ओशन ने गाया. मेरी इच्छा हुई कि ज़रा जानूँ तो सही मामला क्या है. मैं अपने दोस्त मेजर संजय के साथ उनसे जून 1999 को उनके स्टूडियो में जाकर मिला. उस मुलाक़ात और उनके "हिलेले" नंबर के बारे में मैंने "हंस" में लिखा भी(पृष्ठ 60, सितंबर 1999).
उस टिप्पणी का एक अंश पेश करता हूँ-
"...इंडियन ओशन के युवा गायक अमित किलम ने बातों ही बातों में बताया कि हमारा नया नंबर आ रहा है- हिलेले. जब उनसे पूछा गया कि इसमें क्या है तो उन्होंने बताया कि हम कहना चाहते हैं कि बदलती दुनिया और आर्थिक उदारीकरण के दौर में भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र बनकर उभरा है और हम दुनिया को दिखा देना चाहते हैं कि हम कमज़ोर राष्ट्र नहीं हैं and we are so strong in the world कि सब कुछ हिलाकर रख देंगे.(देश सही जा रहा है?)
...इंडियन ओशन के कम्पोज़र राहुल इस गीत के बारे में कहते हैं कि this is a song written by guy called Gorakh Pandey, the song originally in Bundelkhandi and we have taken few lines from this...यह गीत आंदोलनों में गाया जाता था and was very popular during our freedom movement इसमें बहुत मज़ा है, इसमें सब कुछ हिलता है, झोपडी हिलती है, मकान हिलता है, पेड हिलते हैं और मेरा मतलब है सब कुछ हिलता है."
आपने पहले कई बार सुना होगा ये गीत लेकिन आज सुनिये पहले इसका ओपनिंग म्यूज़िक फिर गीत "हिल्लेले"-
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आपको नहीं लगता कि सिर्फ़ इतिहासच्युत लोग ही इसे पसंद करते होंगे?