
मुनीश से मेरी दोस्ती अब उतनी ही पुरानी हो चुकी है जितनी राम पदारथ से मेरी दुश्मनी. इस शुरुआती लाइन के बाद मैं सीधे मुद्दे पर आता हूँ जिसका सम्बन्ध इन दिनों ज़ोर-ओ-शोर से चल रहे एक यात्रा अभियान से है और जिसका सूत्रपात भाई मुनीश ने किया है. अगर यह अभियान सम्भव हो पाता है, जिसकी संभावना अब बलवती होती दीख रही है, तो ब्लोगरों का एक बड़ा समुदाय यह कह कर इसे लांछित करेगा (और एक हद तक मैं भी उस समुदाय में शामिल पाया जा सकता हूँ ) कि इस योजना को मोटर सायकिल पर प्रस्तावित किया गया है जो kइ भारत जैसे देश में अब भी महिलाओं का प्राथमिक वाहन नहीं है. इस प्रकार चाहे अनचाहे महिला ब्लोग्गेर्स को इस muhim से बाहर रखने की उनकी इच्छा पर उंगली उठाई जानी चाहिए. काफिले में चार पहियों की गाडी अभी ठोस रूप से शामिल नहीं की गई है. क्या इसमे मुनीश की उस dhankee भावना का हाथ है, जिसमे सुनते हैं की वो औरतों को घरेलू काम के लिए ज़्यादा सक्षम पाते हैं?
मित्रो इस ऐतिहासिक यात्रा को बेदाgh बनाने के लिए ज़रूरी है कि इसके ऊपर संभावित lanchhanon को जल्द अज जल्द दूर करने का प्रयास किया जाए.
Photo curtesy http://www.motorcycle-friendly.com
Hindi Writing Tool ke abhaav me likha gaya.