टूटी हुई बिखरी हुई
क्योंकि वो बिखरकर भी बिखरता ही नहीं
दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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स्कूल की कविता
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Wednesday, January 4, 2012
जैसे जंगल के जानवर खेलते हैं आओ वैसे ही खेलें !
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