दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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Monday, May 19, 2008

हल

सत्रह जून के बलवे के बाद
लेखक संघ के सचिव ने
स्तालिन मार्ग पर पर्चे बंटवाए
जिनमें कहा गया था कि
जनता ने सरकार का विश्वास खो दिया है
और अब दुगने प्रयत्नों से ही
उसे पा सकती है. ऐसी हालत में
क्या सरकार के लिये ज़्यादा आसान नहीं होगा
कि वह इस जनता को भंग कर दे
और दूसरी चुन ले?
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बर्तोल्त ब्रेख़्त

Sunday, September 23, 2007

आरामदेह गाड़ी में सफ़र

खुले इलाक़े में एक बरसाती सड़क पर
एक आरामदेह गाड़ी में सफ़र करते हुए
शाम को हमने एक फटेहाल आदमी को
कोर्निश करते हुए गाड़ी में बिठाल लेने का
इशारा करते हुए देखा

कार की छत थी और अंदर भी काफ़ी जगह थी और हम चलते रहे
और मैंने मुझे चिड़चिड़ी आवाज़ में कहते सुना: नहीं हम किसी को अपने साथ नहीं ले सकते

हमने काफ़ी सफ़र तय किया, शायद एक दिन के कूच का

कि अचानक मुझे अपनी उस आवाज़ से
अपने उस बर्ताव से
और इस पूरी दुनिया से धक्का लगा.

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बर्तोल्त ब्रेख़्त
1937