बयालीस वर्षों की यात्रा के बाद कल मेरी सूरत ऐसी थी. आज मेरा जन्मदिन है इसलिये बधाइयों के लिये पहले से धन्यवाद आदि आपको देता हूँ. चौदह साल पहले
पहलू ने इस मौक़े पर मुझे
एक कविता भेंट की थी, उसके बाद किसी भेंट की अपेक्षा नहीं रह गई है.

आज ही मेरे परम मित्र
संजय जोशी का भी जन्मदिन है. उनको "मैंने कही और तूने मानी, दोनों परम गयानी" दुहराते हुए बधाई देता हूँ.
फ़ोटो फ़रज़ाना ने खींचा है.