दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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Sunday, August 24, 2008

सभी लोग और बाक़ी लोग

पेशे से चिकित्सक डॉ. संजय चतुर्वेदी हिंदी कविता में आए और जल्द ही चले गये. संक्षिप्त उपस्थिति में ही उन्होंने अपनी काव्य प्रतिभा का परिचय दिया. क्यों अब वे कविता की दुनिया में सक्रिय नहीं हैं, बहुत दिनों से उनसे मुलाक़ात नहीं हुई कि जान सकूँ. बहरहाल उनकी एक कविता पढिये-




सभी लोग बराबर हैं
सभी लोग स्वतंत्र हैं
सभी लोग हैं न्याय के हक़दार
सभी लोग इस धरती के हिस्सेदार हैं
बाक़ी लोग अपने घर जाएँ

सभी लोगों को आज़ादी है
दिन में, रात में आगे बढने की
ऐश में रहने की
तैश में आने की
सभी लोग रहते हैं सभी जगह
सभी लोग, सभी लोगों की मदद करते हैं
सभी लोगों को मिलता है सभी कुछ
सभी लोग अपने-अपने घरों में सुखी हैं
बाक़ी लोग दुखी हैं तो क्या सभी लोग मर जाएँ

ये देश सभी लोगों के लिये है
ये दुनिया सभी लोगों के लिये है
हम क्या करें अगर बाक़ी लोग हैं सभी लोगों से ज़्यादा
बाक़ी लोग अपने घर जाएँ.


संजय चतुर्वेदी
प्रकाशवर्ष संग्रह की पहली कविता