विष्णुखरेहिंदी कविता के जाने-माने नाम तो हैं ही, कुछ और चीज़ों में भी उनकी गहरी दिलचस्पी है. कोई दो साल पहले मैंने उनसे हिंदी फ़िल्मी गानों पर बात करने के लिये 15-20 मिनट का समय चाहा था. बात चली तो हम कोई दो घंटे इस विषय पर बतियाते रहे. तब मैं ब्लॉग नहीं लिखता था और बाद में उस बातचीत से समृद्ध मेरी यह टिप्पणी अविनाशजी ने अपने ब्लॉग पर जारी भी की थी.
बहरहाल आज उस संदर्भ की याद सिर्फ़ इसलिये ताज़ा हो आई कि यह गीत(नीचे सुनें) सुन रहा था तो विष्णु जी के शब्द कानों में गूँज उठे- "अ हा हा...चमन में रहके वीराना मेरा दिल होता जाता है...गर्मियों की किसी दोपहर में कभी इस गीत को सुनिये तो लगेगा कि एक वीरानी सी छाने लगी है"
शमशादबेगम आज भी हमारे बीच हैं और अच्छा लगता है ये सोचकर कि आज रात जिस चाँद को उन्होंने नज़र उठाकर देखा होगा उसे हमने भी देखा.
हमारा साहित्य कई कालजयी रचनाओं से भरा पडा है. मानवता की करुण दास्तानें और उनकी निर्दोष अभिव्यक्तियों की बानगियाँ चप्पे-चप्पे पर दर्ज हैं. रेडियोरेडसमय-समय पर इन्हीं रचनाओं का महत्व और उत्सव रेखांकित करता रहता है. इसी क्रम में आज पेश है सियारामशरण गुप्त की शॉर्ट स्टोरी काकी. आवाज़ है हमारी सहकर्मी राखी की.
अगर आपको इस बात पर बहस करना है कि अटल बिहारी वाजपेयी युग के इतने बडे कवि हैं जिनकी रचना को गाना लता मंगेशकर के लिये बेहद ज़रूरी था तो आइये. वरना ये बताइये कि क्या पाश, वरवर राव, गोरख पांडेय, मुनव्वर राणा, आदि की रचनाएँ इतनी ग़ैरमाक़ूल हैं जिन्हें युग की महान गायिका गाना पसंद नहीं करती?
गीतनयागाताहूँ...
अगर आपको इस बात पर बहस करना है कि अटल बिहारी वाजपेयी युग के इतने बडे कवि हैं जिनकी रचना को गाना लता मंगेशकर के लिये बेहद ज़रूरी था तो आइये. वरना ये बताइये कि क्या पाश, वरवर राव, गोरख पांडेय, मुनव्वर राणा, आदि की रचनाएँ इतनी ग़ैरमाक़ूल हैं जिन्हें युग की महान गायिका गाना पसंद नहीं करती?
You talk like Marlene Dietrich And you dance like Zizi Jeanmaire Your clothes are all made by Balmain And there's diamonds and pearls in your hair, yes there are
You live in a fancy apartment Off the Boulevard Saint-Michel Where you keep your Rolling Stones records And a friend of Sacha Distel, yes you do
You go to the embassy parties Where you speak in Russian and Greek And the young men who move in your circle They hang on to speak to you, yes they do
But where do you go to my lovely When you're alone in your bed Tell me the thoughts that surround you I want to look inside your head, yes I do
I've seen all your qualifications You got from the Sorbonne And the painting you stole from Picasso Your loveliness goes on and on, yes it does
When you go on your summer vacation You go to Juan-les-Pins With your carefully designed topless swimsuit You get an even suntan on your back and on your legs
And when the snow falls you're found in Saint Moritz With the others of the jet-set And you sip your Napoleon brandy But you never get your lips wet, no you don't
But where do you go to my lovely When you're alone in your bed Won't you tell me the thoughts that surround you I want to look inside your head, yes I do
You're in between twenty and thirty A very desirable age You'r body is firm and inviting But you live in a glittering stage, yes you do
Your name, it is heard in high places You know the Aga Khan He sent you a racehorse for Christmas And you keep it just for fun, for a laugh, a-ha-ha-ha
They say that when you get married It'll be to a millionaire But they don't realize where you came from And I wonder if they really care, or give a damn
Where do you go to my lovely When you're alone in your bed Tell me the thoughts that surround you I want to look inside your head, yes I do
I remember the back streets of Naples Two children begging in rags Both touched with a burning ambition To shake off their lowly-born tags, so they try
So look into my face Marie-Claire And remember just who you are Then go and forget me forever But I know you still bear the scar, deep inside, yes you do
I know where you go to my lovely When you're alone in your bed I know the thoughts that surround you 'Cause I can look inside your head ----------------------------------- Text transcribed byAshok Pande
पतनशीलता एक सतत द्वंद्व है. आइये सुनें कि इस कश-म-कश से गुज़रता एक शख़्स किन-किन चीज़ों को याद कर रहा है और अपने मन को समझाता कुछ समझने की कोशिश कर रहा है.
हक्कू साहब ने इच्छा ज़ाहिर की है कि मैं अपने एक पुराने प्रोडक्शन की झलक यहाँ रखूँ. पेश करता हूँ ख़ुद हुसेन साहब की आवाज़ में इस नायाब ऑडियोबुक की ओपनिंग. इस पाँच घंटे की ऑडियो बुक का एक-एक शब्द हुसेन साहब का लिखा हुआ है. उन्होंने मेरे लिये पाँच नये अध्याय भी लिखे जो इन बावन छोटे-बडी कहानियों में शामिल हैं. टूटीहुईबिखरीहुईपर इनमें से एक दो कहानियाँ आप पहले भी सुन चुके हैं।
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वैलेंटाइन डे पर एक ख़ास पेशकश. सुनिये एक भोजपुरी युवती आज के दिन अपने प्रिय से क्या कह रही है. स्वर नीलम ग्यान का है. मोहम्मद उस्मान के लिखे गीत को संगीतबद्ध किया है के.एस.नरूला ने.
"निष्ठुर" मैं अनु को यही कहकर याद करता हूँ. ऐसी बात नहीं है कि उसने मुँह मोड लिया है. उपेक्षा करती थी मेरी लेकिन उसके सलोने मुखडे पर भावुकता के क्षण उभरते हुए नहीं देखे थे मैंने.
"बहुत भावुक हो तुम" वो कहती थी. ज़रा सी बात पर तुम बेचैन हो उठते हो, ख़ुश हो जाते हो, रो देते हो, लंबी-लंबी बातें करते हो. क्या है ये सब? फिर वो मेरे गालों पर अपनी उँगलियाँ रखती. मेरी आँखें थोडी देर को उसकी तरफ़ उठतीं और मैं किसी निर्वात में खो जाता, जबकि वो मुझे निर्निमेष निःशब्द देर तक देखती रहती. मैं एक जादू में बँधा उसकी नाज़ुक उँगलियों को माथे पर छुलाता, आँखों से लगाता.
कहीं एक मौन था और हम दोनों इस मौन के इस पार और उस पार रहते. हमारी आँखों के दायरे भीगे होते और कहीं से उभरती तरलता की लहरों पर भावों की नौकाएँ धीरे-धीरे हिचकोले लेतीं, जिनके चप्पुओं की आवाज़ें हमारे दिलों की धडकनों में घुल जातीं और एक अजाना डर पसरता कि दूरी कम होने से नावें टकरा न जायें.
चुप्पी, सन्नाटा, तरलता, चमक और फिर मोहक मुस्कान! मेरे बालों में उँगलियाँ फँसाकर माथे को हल्की जुंबिश देती-- "उठो भावुक मत बनो". ---------------------------------
An extract from Dil Ne Phir Yaad Kiyaa, 24 Oct 2006