टूटी हुई बिखरी हुई
क्योंकि वो बिखरकर भी बिखरता ही नहीं
दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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Mangalesh Dabral
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Saturday, March 28, 2015
एक जीवन के लिये: मंगलेश डबराल
दूसरा हाथ: मंगलेश डबराल
बारिश: मंगलेश डबराल
अकेला आदमी: मंगलेश डबराल
दादा की तस्वीर: मंगलेश डबराल
पिता की तस्वीर: मंगलेश डबराल
मां की तस्वीर: मंगलेश डबराल
प्रेम करती स्त्री: मंगलेश डबराल
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