दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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Wednesday, April 9, 2008

एक FM लिस्नर का ख़त...बाक़ी हिस्सा

कल मैंने हसीन का ख़त जारी किया तो यारों को बहुत हँसी आई. मुझे भी आती है. फिर लगता है कि कहीं हम ख़ुद के बारे में किसी ख़ुशफ़हमी के शिकार तो नहीं हैं! हम सभी के अंदर एक हसीन रहता है या हसीना रहती है. हमारा ग़ुस्सा और हमारे वीयर्ड थॉट्स कभी इस और कभी उस फ़ॉर्म में सामने आते हैं. फ़र्क़ ये है कि हमने उन्हें छुपाना(पढें रचनात्मक बनाना)सीख लिया है/सीख रहे हैं और हसीन उस आर्ट को साध नहीं पाया है. दिखाने से ज़्यादा छुपाने के जिस खेल में हम हैं, हसीन अभी उससे दूर है शायद, इसीलिये हम हँसते हैं और उसे दुर्दांत कहते हैं. हसीन का ख़त कल से आगे पढिये, इस ख़त का ये आख़िरी हिस्सा है.

...मैनें ग़ज़ाला को हमेशा के लिये छोड दिया है और मेरी ज़िंदगी में उसकी जगह सुकिया की लडकी ने ले ली है. सुकिया, जो हमारे मोहल्ले में रहता था, कुछ हफ़्तों पहले उसकी मौत हो गई.सुकिया की वो लडकी जो कल राशन की दुकान पर गई थी, मिट्टी का तेल लेने, जब मैंने उसे देखा था, उसने ग़ज़ाला की जगह ले ली है. यानी अब मेरी शादी ग़ज़ाला के बजाय उससे होगी. लेकिन सुकिया की उस लडकी को काला रंग नहीं मिला है बल्कि मैंने उसे हरा रंग दिया है. चौंको नहीं! मेरे पास हरे रंग की दो शर्ट हैं. एक पुरानी हरे रंग की शर्ट मेरे पास थी, जो मैंने इस वक़्त पहन रखी है.

रहमान को जान से नहीं मारा/मरवाया जाएगा और न ही मैं रहमान को किसी तरह की सज़ा देना/दिलवाना चाहता हूँ.

लेकिन रहमान की बीवी और मेरी बहन राशिदा को सज़ा मिलेगी.राशिदा के लडके सोनू को सज़ा मिलेगी. रहबर और क़ैसर को सज़ा मिलेगी.राशिदा के सास-ससुर को सज़ा मिलेगी, मुदस्सिर को सज़ा मिलेगी.

इन सब की सज़ा ये है कि इनकी ख़ुशियाँ हमेशा के लिये ख़त्म हो जाएँगी. ये चाहे जो भी करें इनकी ज़िंदगी में कभी ख़ुशी न हो.इनका सुख चैन हमेशा के लिये खो जाए और इनकी ज़िंदगी में किसी तरह की कोई तरक़्क़ी न हो. जो कुँवारे हैं वो हमेशा के लिये कुँवारे रहें. और हाँ ग़ज़ाला, गुलिस्ताँ और अर्शी को भी सज़ा मिलेगी. उनकी सज़ा भी वही है जो राशिदा, सोनू, रहबर आदि की है और वे भी हमेशा कुँवारी रहें.

(22) हमारे मुहल्ले में रहनेवाले रियाज़(मुंकीवाले)को और उसके लडके शहज़ाद को सज़ा मिलेगी. रियाज़ की सज़ा ये है कि वो किसी लायक़ भी न रहे. बिरादरी में रिश्तेदारी में कोई भी आदमी उसकी इज़्ज़त न करे, उससे सलाम दुआ भी न करे और न उसके पास उठे-बैठे और न उसे अपने पास बुलाए-बिठाए. रियाज़ पूरी तरह से बेकार और बदनाम हो जाए.जब भी कहीं कोई ब्याह शादी हो, किसी भी तरह का कोई फ़ंक्शन हो, तो वो/वे ब्याह-शादी करने/करवाने वाला/वाले कभी भी रियाज़ को ब्याह-शादी या/और किसी तरह के फ़ंक्शन में न बुलाए, उसे कोई आमंत्रण/ इनवीटेशन न भेजे.

और रियाज़ के लडके शहज़ाद की सज़ा ये है कि वो बदमाश और आवारा लडके की तरह रहेगा, जैसा कि वो अब है और अपने बदमाशी भरे कामों से और अपनी आवारगी से वो अपने माँ-बाप का सिर नीचा करवाए और फिर एक दिन ऐसा हो कि वो पुलिस की गोली से मारा जाए. कोई उसका अंतिम संस्कार करने/करवाने वाला भी न हो जैसा कि Encounter: The Killing फ़िल्म में हुआ था.

(23) एक लडका और है धोबी का, उसका दादा अभी एक दो साल पहले मरा.वो बहुत बुड्ढा आदमी था, बहुत उम्र का था. शायद उस लडके का नाम मोहित है. उसका नाम जो कुछ भी है,मैं उसे जानता हूँ.उसका चेहरा पहचानता हूँ. उसने एक बार मुझ पर हमला किया था- अकारण. कोई वजह नहीं थी.उसका घर फ़ारूख़ खरसैलों के बराबर में है. वो लडका मरेगा. उसे मैं मारूँगा या मरवाऊँगा. और उसे मारने का तरीक़ा क्या होगा, ये मैं उसी वक़्त बताऊँगा, जब उसे मारने का वक़्त आएगा. उसे जान से मारने/मरवाने का तरीक़ा उसी वक़्त मैं निर्धारित करूँगा.जब उसे जान से मारने/मरवाने का वक़्त आएगा.

रेडियो मिर्ची के RJ देव को जान से मारने/मरवाने का तरीक़ा ये है कि उसे कंक्रीट की दीवार से टकरा कर और कंक्रीट के फ़र्श पर पटककर मारा जाए ठीक उसी तरह जैसे धोबी धोबीघाट पर पटक-पटककर कपडे धोता है.
अब आई अनु की बारी. रेडियो मिर्ची की अनु को जान से मारने/मरवाने का तरीक़ा ये है कि अनु को संगीत की धुनों से मारा जाए. तरीक़ा ये है कि बहुत बडे-बडे स्पीकर वाला हेडफ़ोन उसके कानों पर लगाया जाए फिर कोई कान फाड देनेवाली धुन उस पर बजाई जाए लेकिन आवाज़ का वॉल्यूम इतना ज़्यादा होना चाहिये कि अनु के कान और दिमाग़ की नसें फट जाएँ. ऐसा करने से पहले अनु को एक कुर्सी पर बिठा कर बाँधा जाएगा और वो संगीत कम से कम पंद्रह मिनट बजाया जाएगा. और अगर वो तब भी नहीं मरी तो उसके हाथ पैर काटकर उसे मारा जाएगा.

मैं सोच रहा हूँ कि अनंत के साथ सौरभ को भी मार दूँ.क्योंकि रेडियो मिर्ची का Rj सौरभ भी क़ुसूरवार है.वो भी उतना ही क़ुसूरवार है जितना कि देव.

अनंत को उसके सीने में गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया जाए और सौरभ को उसकी गरदन काट/कटवाकर मारा/मरवाया जाए.

(24) मुझे अपने अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के द्वारा उन लोगों से पाँच करोड रुपए चाहिये जिन्होंने मुझपर Homosexual होने का इल्ज़ाम लगाया था. जिन्होंने यह जानने की कोशिश की थी कि मैं Homosexual हूँ या नहीं. उनकी उस बात से मुझे बहुत दुख हुआ था और मुझे उनसे compensation में पाँच करोड रुपये चाहिये. इन पाँच करोड रुपयों के अलावा मुझे सरकार से और पोस्ट ऑफिस/पोस्टल डिपार्टमेंट से दस लाख रुपये चाहिये, मेरे बिना एड्रेस के पत्र मेलबॉक्स से निकाल कर सडक पर फेंकने के इलज़ाम और Compensation में. क्योंकि इस बात से भी मुझे बहुत आघात पहुँचा था.
हमारे कारख़ाने के सामने "बॉबी ब्यूटी पार्लर" के सामने जो जंगलियोंवालों के निज़ाम की जूही नाम की कढाई आदि की दुकान है, ये दुकान यहाँ से ख़त्म हो जाए.

अगर इनमें से कोई ऐसी बात जो लिखने से रह गई है, जो मैंने पहले लिखी/कही थी लेकिन इस बार अगर नहीं लिख पाया क्योंकि वो बात मेरी याद में , मेरे दिमाग़ में इस वक़्त नहीं आई तो वो बात, वो काम भी इन बातों में शामिल कर लिया जाए.

जब ये काम होंगे सिर्फ़ तभी नेहा से मेरी शादी मिलन संभव है, वरना नहीं. अगर इनमें से एक भी काम न हुआ या अगर ये सारे काम न हुए तो फिर किसी भी हालत में, किसी भी क़ीमत पर, कभी भी नेहा से मेरी शादी नहीं होगी, उससे मेरा मिलन नहीं होगा और फिर उसे और रिंकी को जीवन भर उसी तरह तन्हाई में रहना पडेगा,जिस तरह मैंने लिखकर बताया था.

-हसीन

हाय-हाय एक लड़का मुझको ख़त लिखता है...उर्फ़ एक और लिसनर का ख़त


हसीन नाम का यह लिसनर कहाँ का है और क्या करता है, यह कभी पता नहीं चल सका लेकिन उसके ख़त मुझे हमेशा हँसाते हैं। पिछले साल उसका एक लिफ़ाफा आया जिसमें ख़त पेज नम्बर नौ से शुरू हो रहा था। मैं अभी तक राह देख रहा था कि पेज एक से आठ तक वाला उसका लिफ़ाफ़ा आए तो बात का सिरा पकड में आए लेकिन इस लम्बे इंतज़ार के बाद लगता है कि वह पहला लिफ़ाफ़ा डाक में कहीं गुम हो गया है इसलिये वही पत्र यहाँ जारी करता हूँ-

...मक्खियाँ उसके जिस्म में डंक मारें। जब हज़ारों मधुमक्खियाँ उसके जिस्म में डंक मारेंगी तो उसका जिस्म पूरी तरह सूज जाएगा तब वो मर जाएगा। और अगर वो तब भी न मरा तो 24 घंटों बाद उसे पीट-पीटकर लात घूसों से और लाठियों से जान से मार दिया जाएगा। और जंगलियोंवाले निज़ाम के लड़के गुड्डू (ज़ुबेर) को मेरे बताए तरीक़े से जान से मार/मरवा दिया जाए और गुड्डू (ज़ुबेर) के साथ जो गोरा लड़का था, जो गुंजन (आरज़ू) के पीछे लगा था उसे पाने के लिये वो गुड्डू(ज़ुबेर) की ख़ाला का लडका था या उसके ताऊ का या चाचा का लडका था, वो जो कोई भी था, उसे भी मेरे बताए तरीक़े से जान से मार-मरवा दिया जाए।
(7) हमारे कारीगर शाहिद के भैया साजिद को भी मेरे बताए तरीक़े से जान से मार-मरवा दिया जाए और शाहिद हमेशा के लिये हमारे कारख़ाने से चला जाए। फिर वो कहीं भी करे, हमारे यहाँ काम न करे.
(8) नवाब के लडके हसीब को मेरे बताए तरीक़े से जान से मार-मरवा दिया जाए।
(9) इमली के लडके फ़ुरक़ान (रोबिन) को भी मेरे बताए तरीक़े से जान से मार-मरवा दिया जाए। रोबिन को उसके दिमाग़ में गोली मार/मरवा कर जान से मारा जाएगा.
(10) फ़ुरक़ान, अनस और रूमान को भी जान से मारा जाएगा। मेरे तरीक़ों से रूमान को एक आसान मौत मिलेगी। उसे फाँसी पर लटकाकर मारा/मरवाया जाएगा. लेकिन फ़ुरक़ान और अनस दोनों को ख़तरनाक मौत मिलेगी. फ़ुरक़ान को बस या ट्रक के पहिये के नीचे कुचलवा कर मारा जाएगा. फ़ुरक़ान की बीवी शगुफ़्ता को भी जान से मारा/मरवाया जाएगा. और उसे इसी तरह यानी बस या ट्रक के पहिये के नीचे कुचलवा कर मारा मरवाया जाएगा. और अनस को एक ऊँची बिल्डिंग से गिराकर मारा/मरवाया जाएगा.
(11) नाज़रीन को भी मारा/मरवया जाएगा, मेरे तरीक़े से नहीं, उसे ज़िंदा छोडा जाएगा।
(12) नाज़रीन के मियाँ को जान से मारा-मरवाया जाएगा, मेरे तरीक़े से और नाज़रीन के मियाँ से नदीम के चाचा के उस लडके को भी मेरे तरीक़े से जान से मारा/मरवाया जाएगा जो नदीम के साथ हमारे घर हापुड आया था।
नाज़रीन ज़िंदगी भर उस हालत में रहेगी जिस हालत में रेहान के बच्चे रहेंगे, रूमान को छोडकर, क्योंकि उसे तो जान से मार/मरवा दिया जाएगा। और ये बात मैं बता चुका हूँ कि रेहान के बच्चे (रूमान को छोडकर) किस हालत में रहेंगे। रेहान के बच्चों के साथ वैसा होगा जैसा मैने कहा था. और अब मैं ये कह रहा हूँ कि रेहान की बाक़ी लडकियाँ जीवन भर कुँवारी रहेंगी उनकी शादी नहीं होगी.
(13) रेहान की बीवी को भी जान से मार/मरवा दिया जाएगा, मेरे तरीक़े से। और रेहान की बीवी को जान से मारने मरवाने का तरीक़ा ये है कि रेहान की बीवी को ज़हर देकर मारा/मरवाया जाएगा.
(14) नेहा के बाप को भी मेरे तरीक़े से जान से मारा/मरवाया जाएगा। और नेहा के बाप को जान से मारने/मरवाने का तरीक़ा ये होगा कि ख़ुद नेहा अपने बाप को गोली मारेगी. जीहाँ नेहा ख़ुद अपने बाप के सीने में गोली मारेगी और उसे ऐसा करना होगा.
(15) ज़ुबेदा की लडकी निशा को जान से नहीं मारा/मरवाया जाएगा लेकिन कलुवा भाई का लडका नवेद मरेगा। नवेद को फाँसी लगाकर पंखे से लटकाकर मारा जाएगा.
लेकिन चूँकि ज़ुबेदा ने मेरे ख़िलाफ़ काम किये/करवाए और करने/करवाने की कोशिश की इसलिये ज़ुबेदा मरेगी। ज़ुबेदा अक्सर बीमारी की शिकायत करती है कि वो बीमार रहती है, इसलिये वो अपनी ही किसी बीमारी से पीडित होकर 24 घंटे के अंदर मरेगी। यानी जब उसे मरना होगा तो उसे कोई भयंकर बीमारी हो जाएगी और उसी बीमारी से वो चौबीस घंटे के भीतर मर जाएगी। उसकी औलादों की ज़िंदगियाँ उसी तरह रहेंगी जैसे कि रेहान की औलादें(रूमान को छोडकर) और नाज़रीन की रहेंगी. यानी कि भिखारियों की तरह. उन्हें कभी जीवन में भरपेट खाना नहीं मिलेगा. हर चौबीस घंटे में सिर्फ़ एक बार खाना खाने को मिलेगा, वो भी भरपेट खाने को न मिलेगा, खाना उनकी पसंद का न होगा और अच्छा न होगा.
फ़ुरक़ान के बच्चे भी इसी हालत में रहेंगे जिस हालत में ज़ुबेदा और रेहान के बच्चे रहेंगे और जिस हालत में नाज़रीन रहेगी।
(16) रियाज़ का लडका चीकू मरेगा। उसको ज़हर देकर मारा जाएगा.
(17) अर्जुन पहाडी को भी जान से मारा जाएगा। उसको जान से मारने/मरवाने का तरीक़ा ये है कि पहले उसकी दोनों आँखें फोडी जाएंगी क्योंकि उन्हीं आँखों से उसने आरज़ू (गुंजन) को देखा था, फिर उसकी गरदन काट दी जाए और उसके जिस्म के चार टुकडे कर दिये जाएँ।
(18) अक़ील और मेरी बहन साजिदा दोनों बहुत हरामी निकले। दोनों ही ख़राब हैं इसलिये दोनों को ही अल्ला को प्यारा हो जाना चाहिये। अक़ील को गर्म उबलते (खौलते) हुए पानी में डालकर मारा जाए। साजिदा को ज़हर देकर/खिलाकर मारा जाए.
(19) साजो लडके इमरान को कुत्ते की मौत मारा जाएगा। उसे काटकर सडक पर फेंक दिया जाए जहाँ कुत्ते उसके कटे हुए अंग खाएँगे.
(20) क़ारी साहब का लडका, जो हमारे मोहल्ले की मस्जिद में नमाज़ पढाता है, उसे जान से नहीं मारा/मरवाया जाएगा लेकिन जैसा बरताव उसने मेरे साथ किया, जिस तरह वो मेरे ख़िलाफ़ हुआ और जैसा वो आदमी है, इन सब बातों को देखते हुए उसे सज़ा मिलेगी और सज़ा ये है कि वो किसी लायक़ भी न रहे। उसने जो क़ुरान याद किया है वो उसे भूल जाए, उसने जो अब तक इल्म हासिल किया है, वो उस सारे इल्म को भूल जाए, वो अपनी सारी तालीम को भूल जाए, उसे कुछ भी याद न रहे। क़ारी साहब का लडका कभी भी मेरी नज़रों में अच्छा नहीं था और न ही अब है. वो अच्छा आदमी नहीं है.
(21) मैं ग़ज़ाला से शादी नहीं करूँगा और न ही करना चाहता हूँ। मैं आज इस बात का ऐलान कर रहा हूँ कि......
(जारी है)

नोट: प्रस्तुत ब्लॉगर दिल्ली में एफ़एम रेडियो जॉकी है। वह श्रोताओं के पत्रों की एक बानगी यहाँ भी जारी कर चुका है.