टूटी हुई बिखरी हुई
क्योंकि वो बिखरकर भी बिखरता ही नहीं
दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
Showing posts with label
poems
.
Show all posts
Showing posts with label
poems
.
Show all posts
Monday, December 31, 2007
फहमीदा रियाज़ की दो नज़्में और, साल को अलविदा
नज़्म- एक
नज़्म- दो
Saturday, December 29, 2007
एक ही जैसे दु:खद प्रसंग हैं...
...आइये सुनें मशहूर पाकिस्तानी शायरा
फ़हमीदा रेयाज़
की एक और नज़्म.
नोट: साल के इन बचे हुए दिनों में टूटी हुई बिखरी हुई पर बस यही होगा.
वो लड़की
Thursday, November 1, 2007
त्रिलोचन के साथ सुबह के कुछ घंटे और कुछ ब्लॉग्स पर मौजूद उनकी कुछ कविताएं
कृपया
यहां
पढ़ें.
फोटो:
पंखुड़ी सिंह
, 31 अक्टूबर 2007
Wednesday, August 15, 2007
वीरेन डंगवाल की एक और कविता
वीरेन डंगवाल के प्रिय कवि शमशेर बहादुर सिंह को समर्पित उनकी यह कविता.
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)