दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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Saturday, December 29, 2007

एक ही जैसे दु:खद प्रसंग हैं...



...आइये सुनें मशहूर पाकिस्तानी शायरा फ़हमीदा रेयाज़ की एक और नज़्म.


नोट: साल के इन बचे हुए दिनों में टूटी हुई बिखरी हुई पर बस यही होगा.

वो लड़की

Wednesday, August 15, 2007

वीरेन डंगवाल की एक और कविता


वीरेन डंगवाल के प्रिय कवि शमशेर बहादुर सिंह को समर्पित उनकी यह कविता.