टूटी हुई बिखरी हुई
क्योंकि वो बिखरकर भी बिखरता ही नहीं
दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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फिरकापरस्ती
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Saturday, May 14, 2011
कल मेरी सालगिरह पर आपने मुझे बधाइयाँ भेजीं शुक्रिया !
शुक्रिया अदा
करते हुए आपको एक क़व्वाली सुनवाता हूँ। यह मेरे उस खजाने से है जिसके मोती आप गुज़रे बरसों में मेरे इस ब्लॉग पर गाहे बगाहे चुनते रहे हैं। ये बस एक बहाना है आपका दो घड़ी का साथ पाने का ।
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