टूटी हुई बिखरी हुई
क्योंकि वो बिखरकर भी बिखरता ही नहीं
दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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चलो मन
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Monday, December 31, 2007
साल की पहली पेशकश
जब बहुत शोर हो और कुछ रस्मी-बेमानी शुभकामनाओं और शुभेच्छाओं से मन उकता जाये तो आइये कहें.
फिल्म
: स्वामी विवेकानंद (1998),
संगीत
: सलिल चौधरी,
गीत
: गुलज़ार
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