टूटी हुई बिखरी हुई
क्योंकि वो बिखरकर भी बिखरता ही नहीं
दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
Showing posts with label
नंगी आवाज़ें
.
Show all posts
Showing posts with label
नंगी आवाज़ें
.
Show all posts
Thursday, November 8, 2007
रेडियो रेड और क़िस्सागोई: सआदत हसन मंटो का अफ़साना नंगी आवाजें
मंटो
की कहानियाँ मेहनतकश जनता के मनोजगत का दस्तावेज़ भी हैं. सुनिये
नंगी आवाज़ें
और महसूस कीजिये उस मानवीय करुणा का ताप, जिसे बाहर रहकर पेश कर पाना बडे जिगरे का काम है.
शुरुआत में आवाज़ें
अरशद
इक़बाल
और
मुनीश
की हैं.
क़िस्सागो
:
इरफ़ान
Duration: 20 Min.
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)