दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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Sunday, September 16, 2007

एमएफ़ हुसेन को उनकी 92वीं सालगिरह पर मुबारकबाद


हमारे दौर के बड़े ही मक़बूल कलाकार हुसेन का आज जन्मदिन है. आजकल वो जलावतनी की ज़िंदगी जी रहे हैं और विकास की होड़ में 'आगे' बढ़ते देश को इस बात पर ज़रा भी शर्म नहीं है.
हुसैन एक मुकम्मल कलाकार हैं.
उनकी आत्मकथा सुनो एमएफ़ हुसेन की कहानी को सुनने के बाद आप एक बिलकुल नयी अनुभूति पर पहुंचते हैं.
इस आत्मकथा को मैंने उनके सहयोग से तैयार किया है. उनके लिखे एक भी शब्द के साथ मैंने छेड़छाड़ नहीं की है. यह उनकी आत्मकथा एमएफ़ हुसेन की कहानी अपनी ज़ुबानी की अविकल प्रस्तुति तो है ही, एक मायने में यह ऑडियो बुक उनकी बुक से अलग और अनोखी भी है, क्योंकि हुसेन साहब ने इस ऑडियो बुक के लिये पांच नये अध्याय ख़ास तौर पर लिखे हैं.
हैरत होती है कि एक नॉन राइटर ऐसा अच्छा गद्य लिख सकता है. एक बार इस ऑडियो बुक को आप सुन लें तो सरस्वती आदि प्रश्न आपको बचकाने और एक हद तक अहमक़ाना लगने लगेंगे.
एक-एक घंटे की इन पांच ऑडियो CDs के पहले वॉल्यूम से सुनिये वो दो हिस्से जिनमें वो अपने दादा को याद करते हैं.दादा जो उनके लिये सब कुछ थे. आइये हुसेन साहब के इस ख़ास तर्ज़े बयां को सुनते हुए उन्हें जन्मदिन की बधाइयां दें.

दादा की उंगली पकड़े एक लड़का









दादा की अचकन







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इस ऑडियो बुक से एक और ट्रैक सुनिये यहां