दिनेश कुमार शुक्ल कवि हैं और प्रशासक भी. उनकी कविताएं अपनी अनोखी छंद योजना और ध्वन्यात्मक प्रभाव के साथ गहरे भाव सृजित करती है. पांच साल पहले उनके घर पर ही उनकी सुधरती स्वास्थ्य स्थितियों के बीच मैने भाई केके पांडेय के साथ स्वयं उनके स्वर में कई कविताएं सुनीं. आप भी इस संग्रह से सुनिये यह कविता.