दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।
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Saturday, October 20, 2007

धरती माता जागो


सुनिये दिनेश कुमार शुक्ल की एक और छंद सघन रचना खुद उनकी ही आवाज़ में.
दिनेश जी की तिलस्म और मालगाड़ी और बंदर चढ़ा है पेड़ पर भी यहां आप सुन चुके हैं.

Wednesday, October 3, 2007

बंदर चढ़ा है पेड़ पर करता टिली-लिली...




सुनिये दिनेश कुमार शुक्ल की एक और कविता. दिनेश जी की एक कविता आप यहां पहले भी सुन चुके हैं।

बंदर चढ़ा है पेड़ पर करता टिली-लिली...

यहां प्ले को चटकाएं और कविता सुनें.

Saturday, August 25, 2007

तिलस्म और मालगाड़ी


दिनेश कुमार शुक्ल कवि हैं और प्रशासक भी. उनकी कविताएं अपनी अनोखी छंद योजना और ध्वन्यात्मक प्रभाव के साथ गहरे भाव सृजित करती है. पांच साल पहले उनके घर पर ही उनकी सुधरती स्वास्थ्य स्थितियों के बीच मैने भाई केके पांडेय के साथ स्वयं उनके स्वर में कई कविताएं सुनीं. आप भी इस संग्रह से सुनिये यह कविता.