
जब बहुत शोर हो और कुछ रस्मी-बेमानी शुभकामनाओं और शुभेच्छाओं से मन उकता जाये तो आइये कहें.
फिल्म: स्वामी विवेकानंद (1998), संगीत: सलिल चौधरी, गीत: गुलज़ार
Monday, December 31, 2007
साल की पहली पेशकश
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क्योंकि वो बिखरकर भी बिखरता ही नहीं
17 टिप्पणियां:
sach kaha aapne, kabhi-kabhi bahut adhik subhkaamnao se bhi man uub jaata hai, mobile to aise baj raha hai, jaise ki bacche ko loose motion ho gaya ho
साल मुबारक । येसुदास साहब का नाम भी दीजिए।
इरफ़ान जी, ये कोरी शुभकामना नहीं है। हम कामना करते है आपके और आपके परिवार के लिए ये वर्ष मंगलमय हो।
नया साल मुबारक !
सस्नेह
अन्नपूर्णा
नया साल आप्को और आप्के परिवार को मुबारक !
सस्नेह
अन्नपूर्णा
rasmi , bemaani shubhechchaen apko!
गीत मन भाया…आभार्……नव वर्ष मंगलमय हो
शुक्रिया इस गीत के लिए!
नया साल आपको पहले से और भी बेहतर कुछ दे जाए! नए वर्ष की शुभकामनाएं
बहुत अच्छी जानकारी !
नया साल आपके और आपके परिवार के लिए खूब सारी खुशियाँ लेकर आये।
नया साल आपके और आपके परिवार के लिए खूब सारी खुशियाँ लेकर आये।
प्रिय ममता, मैंने कौन सी अच्छी जानकारी दी? जानना दिलचस्प होगा.
अभी कैसे अपने घर जा सकते हैं... अभी तो कई फर्ज़ अदा करने हैं सो चलिए अभी इसी दुनिया में नए साल में प्रेम की जोत जला कर पुण्य ढूँढें और पाप की गठरी को हल्का करें... शुभकामनाएँ
aaj sara din yahi geet goonjta raha man me. hala ki pehle bhi suna hai ye.
क्या सुन्दर गीत सुनाया है आपने ! मैंने पहली बार सुना और बहुत अच्छा लग रहा है सुनकर !
नववर्ष की शुभकामनाएँ ।
घुघूती बासूती
नया साला आरंभ हो ही गया है इराफान जी ..
ऐसे ही संजीदा व उम्दा गीत सुनवाते रहियेगा !!
- लावण्या
गीतों के नये सफर के साथ नया साल मुबारक!
इरफान जी वो गलती से पहली लाइन लिख गयी थी। उसके लिए क्षमा चाहते है।
इसीलिए दोबारा हमने टिप्पणी की थी।
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