दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।

Monday, December 10, 2007

ये हैं त्रिलोचनजी: मृत्यु से कोई दस घंटे पहले लिखने की कोशिश में


Trilochan, December 9,2007 Morning
Photo: Pankhuri Singh

2 comments:

डॊ. कविता वाचक्नवी said...

यह चित्र उपलब्ध करवाने के लिए बहुत धन्यवाद। क्या इसे अपने ग्रुप पर प्रयोग के लिए सहेज कर रख सकती हूँ? अनुमति दें तो! कृपया यह भी बताने का कष्ट करें कि यह किसके द्वारा लिया गया चित्र है।

Kavita Vachaknavee said...

Irfa ji
jankari aap ne di,sadashayata ke lie aabhari hoon. chitra ke kisi prayog ko le kar aapatti to nahin hogi?priy Pankhudi ka koi id ya sampark mil sakega?