दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।

Monday, January 13, 2014

तैयारी

यह हमारे लिये चुनौती है
इतिहास के पन्नों में दर्ज किसी भी
चुनौती को मुंह चिढाती

ये यूनीपोलर गुंडे का बढा हुआ लालच है जिसे
पाने की चाह में उछल रहे हैं
हमारे भाग्य विधाता
यह हमारे विकास के लिये ज़रूरी थैली है
अखबार हमें बताते हैं

गलियों में धूल उड़ाते इम्पोर्टेड सामानों से
लदे ट्रक अब आम हो रहे हैं

और कल तक नैतिकता की दुहाई देनेवाले
बड़ी ललचाई नज़रों से इस
लालची बूढे को देख रहे हैं

हम जो तेज़ रफ़्तार गाडियों की चपेट में आने से बच पाए
एक दूसरे का हाथ थामें सड़कें पार कर रहे हैं
सहमे चूहों जैसे हमारे नन्हें चेहरे कोई भी देखना नहीं चाहता
लेकिन युद्ध की इस चुनौती को हमने अपने तकियों के नीचे
सुना है

इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं हैं ऐसी चुनौतियां
और हमें किसी योद्धा से मदद भी नहीं चाहिये
हमारे पहाड़ हैं और सूर्य हमारे नथुनों में करोड़ों वर्षों की
सुगन्धियां भर रहा है
पर्वतों को हमने पुतलियों पर सजाया है
और समुद्र हमारे छोटे सीनों पर गरज कर हमें
वाष्पित करता है
हमने समुद्र को मल लिया है अपने चेहरे पर
और चले आये हैं
इस चुनौती से लोहा लेने.

II इरफ़ान, मद्रास, सितम्बर, 1992 II

2 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

यूनीपोलर गुंडा :-)

वर्षा said...

बहुत सशक्त