
हक्कू साहब ने इच्छा ज़ाहिर की है कि मैं अपने एक पुराने प्रोडक्शन की झलक यहाँ रखूँ. पेश करता हूँ ख़ुद हुसेन साहब की आवाज़ में इस नायाब ऑडियो बुक की ओपनिंग. इस पाँच घंटे की ऑडियो बुक का एक-एक शब्द हुसेन साहब का लिखा हुआ है. उन्होंने मेरे लिये पाँच नये अध्याय भी लिखे जो इन बावन छोटे-बडी कहानियों में शामिल हैं. टूटी हुई बिखरी हुई पर इनमें से एक दो कहानियाँ आप पहले भी सुन चुके हैं।
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Sunday, February 17, 2008
इस तरह शुरू होती है "सुनो एमएफ़ हुसेन की कहानी" Suno M.F.Husain Ki Kahani
छापक इरफान at 2:23 PM
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2 टिप्पणियां:
इफ़्रान भाई आप एम एफ़ हुसेन के पुजारि हो मे भी इस का दुशमन नही हु, लेकिन उसे चहता नही,कारण अभी आप को खुद समझ आ जाये गा, पिछले सप्ताह शायाद १३,२,२००८ मे डेनमार्क की आखवारो मे फ़िर से कुछ चित्र छपे,जो मुस्लिम लोगो की भावनाओ के खिलाफ़ थे,पुरी दुनिया मे डेनमार्क के झाण्डे फ़ुके गये,फ़तवे जारी किये गये , आप बताये गे किस लिये, बो सब भी तो आप के एम एफ़ हुसेन की तरह से एक चित्र्कार ही तो हे,फ़िर यह लोग हिन्दुओ कि तरह से कयो उन चित्रकारो के नाम से चिल्ला रहे हे,मे एक हिन्दु हु लेकिन अन्ध विशबासी नही, लेकिन जब कोई भी दुसरे की भावनायो से खेले मजाक करे तो वो व्यक्ति घ्रर्णा के काबिल होता हे,इज्जत ओर प्यार के कबिल नही,बाकी अगर आप के एम एस हुसेन इतने ही बडे चित्रकार हे तो एसी चित्रकारी मोहमद पर क्यो नही बनाते,कयो डेनमार्क बालो पर चिल्लते हे आप के लोग,आप उन चित्रओ को कयो नही अपने बलोग पर डालते,कयो नही डेनमार्क के चित्रकारो की तारीफ़ के पुल बाधते,मियां जिस मा की गोद मे जनम लिया हे उस की इज्जत करना सीखो,उस परिवार मे मिल्जुल कर रहना सिखो.
मेरी किसी बात से दुख पहुचे तो माफ़ करना,आप का शुभ चिन्त्क हु दुशमन नही, लेकिन मुस्लिम लोगो से थोडा डराता हु, पता नही कोन किस भेस मे हो
सिर्फ ओपनिंग? पूरी कहानी सुनाएं तब आप साधुवाद के पात्र होंगे. बेसब्री से इंतजार में... हुसैन को सुनना अलग ही अनुभव होगा...
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