दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।

Saturday, February 27, 2010

Friday, February 19, 2010

सईद अख्तर मिर्ज़ा से एक मुलाक़ात


भाई भूपेन का फोटो मेरा ट्रीट किया हुआ है !

भूपेन ने गोरखपुर फिल्म फेस्टिवल के दौरान सईद अख्तर मिर्ज़ा से क्या बात की,आइये सुनते हैं .








Duration: 40 min Approx Recorded on 10th Feb 2010

कुंदन शाह से एक मुलाक़ात


गोरखपुर फिल्म फेस्टिवल में इस बार कुंदन शाह और सईद अख्तर मिर्ज़ा भी आये थे। भाई भूपेन वहां थे और उन्होंने दोनों से बातचीत की।


Friday, February 12, 2010

आरज़ू लखनवी को क्यूँ भूलें ?


सहगल साहब को सलाम और आरज़ू लखनवी को भी। नौशाद साहब जिन आरज़ू को अल्लामा आरज़ू कहकर कान पकड़ते थे , उनके लिखे को न्यू थियेटर के बी एन सरकार पत्थर की लकीर समझते थे ।
सुनिए ये ग़ज़ल -

Thursday, February 11, 2010

पांच किताबें: जिन्हें पढ़ने के बाद आप वो नहीं रहे, जो आप थे !




किताबों से हमारा ऐसा रिश्ता है जिसकी मिसाल ढूंढें नहीं मिलती। हर इंसान, जों अक्षर बांच लेता है, उसकी दुनिया में किताबों का एक या दूसरी तरह का स्थान है। ये सवाल जब हमने राम पदारथ से पूछा तो उन्होंने जों सूची बनाई उसे यहाँ हूबहू पेश करता हूँ।

१ - अपनी खबर : पाण्डेय बेचन शर्मा "उग्र "
२ - कसप : मनोहर श्याम जोशी
३ - सत्य के प्रयोग : महात्मा गांधी
४ - प्रतिनिधि कवितायेँ : मुक्तिबोध
५ - युवा कविके नाम रिल्के के पत्र
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आप की सूची में ऐसी कौन सी किताबें हैं जिन्हें आप इस तरह का सवाल पूछे जाने पर शामिल करेंगे नीचे टिप्पणी में "लिखिए "। चाहें तो मुझे सीधे ईमेल कर सकते हैं- ramrotiaaloo@gmail.com पर।

Friday, February 5, 2010

गुरमा: कुछ तस्वीरें -२

एक अवसाद भरी यात्रा की कुछ तस्वीरें आप पहले देख चुके हैं. अब देखिये दूसरा हिस्सा।
सभी को डबल क्लिक कर के बढाया जा सकता है।


पहलवान नाऊ का लड़का सबसे बाएँ


अस्पताल


गुरमा क्लब का रुपहला पर्दा यहीं टंगा करता था


अब कैंटीन बन गया है क्लब


फैक्ट्री
































बिजली विभाग


....क्या इसी घर में रहते थे जेपी गौड़ ?...यानी जेपी सीमेंट के मालिक ?

Wednesday, February 3, 2010

मैं जसदेव सिंह बोल रहा हूँ


पिछले साल मशहूर कमेंट्रेटर जसदेव सिंह से मैंने एक बातचीत की थी. आप भी सुनिए।



जसदेव सिंह से इरफान की बातचीत
जुलाई 2009, नई दिल्ली : अवधि लगभग आधा घंटा

Tuesday, February 2, 2010

भाई प्रणय कृष्ण को सादर

गोरखपुर में परसों से फिल्म फेस्टिवल (www.gorakhpurfilmfestival.blogspot.com) शुरू हो रहा है. मैं इसकी सफलता की कामना करता हूँ ।
यहाँ मैं एक गाना प्रणय जी को dedicate करना चाह रहा हूँ. तलत साहब का गाया ये गाना प्रणय जी से मैंने एक पिछले गोरखपुर फिल्म फेस्टिवल में सुना था. नीचे फोटो में बाएं वाले प्रणय भाई हैं, काली जैकेट में .