दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।

Thursday, January 8, 2009

मोहर्रम, शहादत और दुख का करुण गायन: सुनिये यह एक लाइफ़टाइम एक्सपीरिएंस साबित होगा

मुहर्रम के मौके पर आइये इस पुरानी पोस्ट को दुबारा देखें.

2 comments:

दीपा पाठक said...

अनायास ही राही मासूम रज़ा के आधा गांव की याद हो आई। धन्यवाद, यह सचमुच ‌अलग किस्म का अनुभव है।

ANIL YADAV said...

धीरज की ओट दुख का गुरूर।........इतनी सादगी।