दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।

Sunday, May 8, 2011

सुनिए टीना सानी को !

पिछले हफ्ते मेरे एक लिसनर सरदार लखविंदर सिंह ने मुझे घर बुलाया। वादा यही था कि मैं पूरा दिन उनके साथ रहूँगा जो मैंने निभाया भी। लखविंदर ग़ज़लों के बड़े शौकीन हैं। बंटवारे से पहले उनका परिवार पाकिस्तान में था। उनकी आत्मा अब भी पाकिस्तान में बसती है इसलिए अक्सर वो वहां जाते रहते हैं। बोले "मेरी दादी बड़ी भोली थीं, जब लोग घरों से बेघर होने लगे तो जो भी सोना चांदी उन्होंने ज़मीन के नीचे गाड़ा हुआ था उसे वहीं छोड़ गयी , बोली क्या होगा... कुछ दिनों में वापस आ जायेंगे ... ऐसा कभी हुआ है...कोई अपना घर छोड़ के कहीं जाता है? हम सैकड़ों साल से यहीं हैं यहीं रहेंगे"
बच्चों कि शादियाँ कर चुके हैं और अपने फैब्रिकेशन के मौजूदा कारोबार से घर गृहस्थी की बची हुई जिम्मेदारियां निभाते हैं। दिल्ली के पश्चिम विहार में रहते हैं। खुद गज़लें कहते भी हैं और श्रोता वो ग़ज़ब के हैं।
जगह जगह से इकठ्ठा किये हुए संगीत के नायाब मोती उन्हों ने मुझे सुनाये।
नूरजहाँ और मेहदी हसन के वो बहुत बड़े फैन हैं।
लखविंदर ek कोमल और बड़े दिलवाले हैं । उनके साथ गुज़रा वक्त संजो कर रखने लायक है।
जो संगीत मैंने लखविंदर जी के साथ सुना उसमें मुझे टीना सानी का गाया ये गीत बहुत अनोखा लगा जिसे मैं घर वापस होते ही भी गुनगुनाता रहा।
लीजिये आप को भी सुनाता हूँ .



अनोखा लाडला खेलन को मांगे चाँद रे ...





Tina Sani
Tina Sani was born in Dhaka, at the time East Pakistan. She studied in Kabul before moving to Karachi, where she earned a diploma in design. She was trained in classical music by Ustad Nizamuddin Khan and then by Ustad Amrohvi.
Tina Sani began working for an advertising agency in 1977. She was involved in all the creative aspects of advertising business, including listening to and evaluating the music that is an integral part of advertising.
She entered the professional world of singing in 1980, when producer Ishrat Ansari introduced her on TV in a youth programme hosted by Alamgir.
She was influenced by the great ghazal singers of like Malika Pukhraj, Begum Akhtar, Mukhtar Begum and Farida Khanum but has created her own style of singing. She gained much acclaim in Pakistan by singing the poetry of Faiz Ahmed Faiz including such poems as 'Bahaar ki ek shaam' and 'Bol' composed by Arshad Mehmood. She renders poetry of contemporary poets with ease and is equally comfortable singing works of Zauq, Ghalib and Mir Taqi Mir; the immortals of Urdu poetry.

(from Wikipedia)

4 comments:

पारुल "पुखराज" said...

vaah!

Kajal Kumar said...

टीना सानी मेरे लिए नया परिचय रहा. धन्यवाद.

Sharad said...

Adbhut, Kahan kahan se dhund kar late hain, badhai

Reyazul Haque said...

...तो? इतना अच्छा गीत सुना देने के बाद आप क्या चाहते हैं कि हम आपके लिए क्या करें?

बहुत अच्छा गीत है. शुक्रिया.