हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते हैं जैसे बच्चे भरे बाज़ार में खो जाते हैं “मुनव्वर राना”

Thursday, March 25, 2010

एक ताज़ा फ़ोटो


रात भारी सही कटेगी ज़रूर,
दिन कड़ा था मगर गुज़र के रहा
-अहमद नदीम क़ासमी

6 टिप्पणियां:

अभय तिवारी said...

बात है भई!

Jandunia said...

आपका पोस्ट किया फोटो देखा।

फ़िरदौस ख़ान said...

Faqt Ek Lafz...Shaandar...

मुनीश ( munish ) said...

Mast coat ! U look like a perfect gentleman indeed !

सुशीला पुरी said...

वाह क्या बात है !!!!!

रंजना said...

वाह !!!!!

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