दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।

Wednesday, January 23, 2013

अब सो जाओ: फ़हमीदा रियाज़

3 comments:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह सुंदर. गूँज कुछ कम रहती तो अच्छा लगता :)

jagmohan said...

क्या बात है

jagmohan said...

भाई सहाब प्रणाम कैसे है...परिवार में सब कुशल है। आप से अब मुलाकात ही नहीं हो पाती है...हां आपकी आवाज़ के साथ कभी कभी हम भी गुनगुना लेते है...एफएम पर...मौका मिले तो हमें याद करिएगा...
जगमोहन आज़ाद