राजेश जोशी ने परसों मेरा शो सुनते हुए मेसेज बोर्ड पर तारीफ़ के दो शब्द लिखे तो पता चला कि वो दिल्ली में हैं। दिल्ली की उनकी पुरानी यादों को समर्पित पेश है ये गीत।
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रवीश कुमार ने अपनारेडियोबचाओ के अभियान पर सहमति जताते हुए फेसबुक पर कहा कि जब तक एफ़ एम गोल्ड पर काम करनेवालों को पैसे नहीं मिल जाते तब तक वो एफ़ एम गोल्ड सुनना बंद कर रहे हैं. प्रबुद्ध श्रोताओं ने हालांकि उनसे यह पूछ ही लिया कि अगर आप सहमत हैं तो एन डी टी वी पर स्टोरी क्यों नहीं करते? बहरहाल स्टोरी तो वो समय आने पर करेंगे ही फिलहाल प्रेस में आजकल आकाशवाणीकीचर्चा है। देश में जनता के टैक्स के पैसे से चलनेवाला यह संगठन सही राह पर चले ... यह चिंता तो सबकी होनी चाहिए।
जब बात निकली तो शुरू में कई लोग बड़े चिंतित दिखे लेकिन अब धीरे-धीरे ज़्यादातर लोग यही साबित कर रहे हैं कि भाई हमें मत घसीटो क्योंकि हमको आल इंडिया रेडियो से अक्सर चेक लेने जाना होता है. जोर से बोलने में आज कल गले पर जोर पड़ता है.इसलिए फुसफुसाओ, बल्कि नाकियाओ.
इकबाल बानो ने फैज़ की जिस रचना को अमर बनाया है, सुनिए नजम शिराज़ ने कम कमाल नहीं दिखाया...