दुनिया एक संसार है, और जब तक दुख है तब तक तकलीफ़ है।

Wednesday, February 20, 2008

पतनशीलता: कुछ आत्मस्वीकार और थोडी कशमकश वाया ज़िया मोहेउद्दीन और मोहम्मद अली रुदौलवी


पतनशीलता एक सतत द्वंद्व है. आइये सुनें कि इस कश-म-कश से गुज़रता एक शख़्स किन-किन चीज़ों को याद कर रहा है और अपने मन को समझाता कुछ समझने की कोशिश कर रहा है.


ज़िया मोहेउद्दीन
..........अवधि-08:04

Tuesday, February 19, 2008

शील, अश्लील और पतनशील: कुछ टिप्स


ऐ नेक ग़रीब भोली हिन्दनियों, इन ख़ुद मतलबियों के कहने को हर्गिज़ न मानो. तुमको पतिव्रता महात्म्य सुनाते हैं और तुम्हारे ख़ाविंदों को को कोकशास्त्र, नायिकाभेद और बहार ऐश और लज़्ज़तुलनिसा की पोथियाँ सुनाकर कहते हैं - इस दुनिया में जिसने दो-चार दस-बीस कन्याओं से संग न किया, उसका पैदा होना ही निष्फल है.

बस अब तुम इस धर्म को छोड दो. ऐसी पति सेवा से स्वर्ग नहीं मिलेगा...नर्क में तुम्हें भी जाना पडेगा.

यह किसी बडे महात्मा का वाक्य है- "जो किसी को बद काम में मदद करता है या उसे मना नहीं करता, वह उसके आधे पाप का भागी हो जाता है."
बस, तुम्हारे इस धर्म करने से तुम्हारे पति अधर्म करते हैं, जब वे किसी ग़ैर स्त्री के पास जाते हैं, तुम उस वक़्त इस धर्म के बाइस बोल नहीं सकतीं क्योंकि ख़ाविंद के बरख़िलाफ़ न बोलना ही धर्म है. बस, वे इस काम में दिलेर हो जाते हैं. ग़रज़, उस वक़्त तुम्हारा कुछ न कहना आइंदा के लिये उन्हें अधर्मी बना देता है. ज्यों-ज्यों तुम इस धर्म में दृढ होती जाती हो, त्यों-त्यों वे अधर्म में ज़्यादा हो जाते हैं. फिर यक़ीन नहीं होता कि तुम्हारे दिल पर कुछ सदमा न होता हो. बस, अपने ही दिल पर सहारती हो. जब नहीं सहारा जाता तो आप ही मर जाती हो. गोया, तुम्हारा यह धर्म, उनका अधर्म, तुम्हारी जान लेनेवाला है. तुम्हारा मतलब इस धर्म के करने से ये था कि वे तुम पर ऐतबार रखें. उलटा तुम ही जेलख़ाने में डाली गयी और शक तुम पर किया गया.सच्चे दिल से धर्म तभी किया जा सकता है जब तुम्हारे ख़ाविंद तुम्हरा ख़याल करें. वह ख़यल तभी कर सकते हैं जब वे ज़नाकारी से बाज़ आएं.

उनको ज़नाकारी से रोकने की यह अच्छी तज़बीज़ है- जब वे किसी औरत के पास जावें, तुम कहो हम भी दूसरे मर्द के पास जावेंगी. अगर किसी रंडी, लौंडे को घर में लाएँ तो तुम फ़ौरन शादी तोड दो.फिर आदि वेद में लिखा भी है-"तैने कीती रामजनी, मैंने कीता रामजना."
----------------------
सीमंतिनी उपदेश, लेखक: एक अज्ञात हिंदू औरत, पृष्ठ-99-100

Sunday, February 17, 2008

इस तरह शुरू होती है "सुनो एमएफ़ हुसेन की कहानी" Suno M.F.Husain Ki Kahani


हक्कू साहब ने इच्छा ज़ाहिर की है कि मैं अपने एक पुराने प्रोडक्शन की झलक यहाँ रखूँ. पेश करता हूँ ख़ुद हुसेन साहब की आवाज़ में इस नायाब ऑडियो बुक की ओपनिंग. इस पाँच घंटे की ऑडियो बुक का एक-एक शब्द हुसेन साहब का लिखा हुआ है. उन्होंने मेरे लिये पाँच नये अध्याय भी लिखे जो इन बावन छोटे-बडी कहानियों में शामिल हैं. टूटी हुई बिखरी हुई पर इनमें से एक दो कहानियाँ आप पहले भी सुन चुके हैं।








-----------------------------------
To buy the product email us to: ramrotiaaloo@gmail.com